मुजफ्फरपुर: मीनापुर में सरकारी हॉस्टल में बच्चों को लैट्रिन वाली बाल्टी से नहाने को मजबूर, मेनू के अनुसार नहीं मिल रहा खाना
मीनापुर के सरकारी हॉस्टल में गंभीर अनियमितता का आरोप। बच्चों को लैट्रिन वाली बाल्टी से नहाने और मेनू के अनुसार भोजन नहीं मिलने का दावा। शिकायत के बाद जांच और कार्रवाई की मांग तेज।
मीनापुर के सरकारी हॉस्टल में गंभीर अनियमितता का आरोप: बच्चों को लैट्रिन वाली बाल्टी से नहाने को मजबूर, मेनू के अनुसार नहीं मिल रहा खाना
मुजफ्फरपुर/मीनापुर। मीनापुर प्रखंड स्थित सुभाष चंद्र बोस उर्दू पिपराहा सरकारी हॉस्टल में बच्चों की सुविधाओं और भोजन व्यवस्था को लेकर गंभीर अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। हॉस्टल के वार्डन और व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए शिकायतकर्ता एवं बच्चों के अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि बच्चों को मूलभूत सुविधाएं तक सही तरीके से उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बच्चों को स्नान के लिए अलग और स्वच्छ बाल्टी उपलब्ध कराने के बजाय लैट्रिन में इस्तेमाल होने वाली बाल्टी से नहाने के लिए मजबूर किया जाता है। वहीं हॉस्टल में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता और निर्धारित मेनू के पालन को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
मेनू के अनुसार नहीं मिल रहा भोजन
शिकायतकर्ता का आरोप है कि हॉस्टल में बच्चों को निर्धारित सरकारी मेनू के अनुसार भोजन नहीं दिया जा रहा है। आरोप के मुताबिक बच्चों को रोजाना लगभग एक जैसा भोजन—दाल, रोटी, सब्जी और चावल—दिया जाता है, जबकि सरकारी हॉस्टल के लिए निर्धारित भोजन मेनू का पालन नहीं होने की बात कही जा रही है।
अभिभावकों और शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की जांच कर हॉस्टल की भोजन व्यवस्था और बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं की वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है।
BDO को दी गई थी लिखित शिकायत
पीड़िता ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने मीनापुर प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) को लिखित शिकायत दी थी। शिकायत मिलने के बाद प्रखंड विकास पदाधिकारी ने आवेदन को संबंधित BO अधिकारी के पास जांच के लिए अग्रसारित कर दिया।
हालांकि शिकायतकर्ता का आरोप है कि आवेदन देने के बावजूद अब तक मामले की निष्पक्ष और विधिवत जांच नहीं की गई है।
जांच से पहले वार्डन को सूचना देने का आरोप
अभिभावकों ने आरोप लगाया कि जांच से पहले ही हॉस्टल के वार्डन तक अधिकारियों के आने की सूचना पहुंचा दी गई। उनका कहना है कि जांच की जानकारी मिलने के बाद हॉस्टल की व्यवस्था को सुधारने की कोशिश की गई।
इस आरोप के बाद जांच की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि अधिकारियों और वार्डन की कथित मिलीभगत के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
समझौते के लिए दबाव और धमकी देने का आरोप
पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि शिकायत करने के बाद उस पर मामले में समझौता करने का दबाव बनाया जा रहा है और उसे धमकाया जा रहा है।
पीड़िता का कहना है कि उसने मामले की लिखित शिकायत मीनापुर प्रखंड विकास पदाधिकारी और संबंधित अधिकारी को दी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
BDO बोले—BO अधिकारी को जांच के लिए किया गया है फॉरवर्ड
मीनापुर के प्रखंड विकास पदाधिकारी ने मामले पर कहा कि शिकायत आवेदन को संबंधित BO अधिकारी के पास जांच के लिए अग्रसारित कर दिया गया है।
शिक्षा पदाधिकारी बोले—मामला मेरे संज्ञान में नहीं था, गड़बड़ी मिली तो होगी कार्रवाई
वहीं, मुजफ्फरपुर के शिक्षा पदाधिकारी ने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं था। हालांकि उन्हें जानकारी मिली है कि करीब तीन दिन पहले हॉस्टल की जांच की गई थी, लेकिन इसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई थी।
उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी लेकर जांच की जाएगी और यदि जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग की ओर से यह भी जानकारी सामने आई है कि हॉस्टल की व्यवस्था को पुराने भवन से नए भवन में स्थानांतरित करने की बात चल रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकारी हॉस्टल में बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं और भोजन व्यवस्था की वास्तविक स्थिति क्या है। शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है, इसका खुलासा निष्पक्ष और विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगा।
बच्चों और उनके अभिभावकों ने जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग से पूरे मामले की जल्द जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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