Agriculture

बिहार फसल मुआवजा 2026: बाढ़-सुखाड़ से नुकसान पर मिलेंगे ₹8500, राहत पैकेज के लिए मांगे ₹10,000 करोड़

Bihar Flood 2026: बिहार में बाढ़ और सुखाड़ से फसलों के नुकसान पर मिलेगा ₹8500 तक मुआवजा। बुनियादी ढांचे के लिए केंद्र से मांगे ₹10,000 करोड़; पढ़ें पूरी खबर।

20 सितंबर 2026 को 10:14 PM बजे
Patna, Bihar
Crime Sach Khabar
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बिहार में बाढ़ और कम बारिश से किसानों पर दोहरी मार, फसल नुकसान पर मिलेगा कृषि इनपुट अनुदान

पटना: बिहार में इस साल मौसम की अनिश्चितता ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। राज्य के कई हिस्सों में नदियों के जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की स्थिति बनी, जबकि कुछ इलाकों में कम बारिश के कारण कृषि कार्य प्रभावित हुए। बाढ़ से बड़ी संख्या में खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान पहुंचा है। सरकार ने प्रभावित किसानों को कृषि इनपुट अनुदान देने की प्रक्रिया शुरू की है। वहीं, बाढ़ से हुए व्यापक नुकसान के बाद राज्य सरकार के विभिन्न विभागों ने केंद्र के समक्ष करीब 10,000 करोड़ रुपये के नुकसान का प्रारंभिक आकलन रखा है।

किसानों को मिलेगा कृषि इनपुट अनुदान

बिहार कृषि विभाग के अनुसार, बाढ़ से क्षतिग्रस्त फसलों के लिए कृषि इनपुट अनुदान योजना के तहत पात्र किसानों को सहायता दी जाएगी। विभाग के पोर्टल पर 2026-27 के लिए बाढ़ से हुई फसल क्षति के संबंध में आवेदन की व्यवस्था उपलब्ध है। योजना का लाभ निर्धारित मानकों के अनुसार प्रभावित किसान परिवारों को दिया जाएगा।

बिहार कृषि विभाग की उपलब्ध योजना गाइडलाइन के अनुसार, 33 प्रतिशत या उससे अधिक फसल क्षति होने पर सहायता का प्रावधान है। वर्षाश्रित/असिंचित फसल क्षेत्र के लिए 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर, सिंचित क्षेत्र के लिए 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर और शाश्वत या बहुवर्षीय फसल के लिए 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर तक अनुदान का प्रावधान बताया गया है। यह सहायता अधिकतम दो हेक्टेयर तक की क्षति के लिए दी जाती है।

कैसे मिलेगा किसानों को पैसा?

कृषि इनपुट अनुदान की राशि पात्र किसानों के बैंक खाते में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजी जाती है। आवेदन के लिए किसान का कृषि विभाग में पंजीकरण और संबंधित मोबाइल नंबर आवश्यक है। 2026-27 के आवेदन पोर्टल पर किसान को ओटीपी के माध्यम से आवेदन करने की व्यवस्था दी गई है। साथ ही आवेदन से पहले किसान अपने पंचायत का नाम प्रभावित पंचायतों की सूची में जांच सकता है।

बाढ़ से करीब 50 लाख लोग प्रभावित

बिहार सरकार के अनुसार, हालिया बाढ़ से राज्य के 15 जिलों में करीब 49.7 लाख लोग प्रभावित हुए। बाढ़ से लगभग 55 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में पानी पहुंचने और फसलों को नुकसान होने की जानकारी सामने आई है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य जारी रहे। सरकार की ओर से राहत शिविरों में भोजन, पेयजल, दवा और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई।

8.27 लाख परिवारों को 7-7 हजार रुपये की राहत

बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए बिहार सरकार ने तत्काल राहत के तौर पर 8,27,472 परिवारों के बैंक खातों में 579.23 करोड़ रुपये डीबीटी के माध्यम से भेजे हैं। प्रत्येक पात्र परिवार को 7,000 रुपये की सहायता राशि दी गई है।

सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि यदि कोई पात्र प्रभावित परिवार राहत सूची से छूट गया है तो उसकी जांच कर उसे भी सहायता उपलब्ध कराई जाए।

केंद्र से करीब 10 हजार करोड़ के नुकसान का प्रारंभिक आकलन

बाढ़ से सिर्फ फसलों को ही नुकसान नहीं पहुंचा है, बल्कि सड़क, पुल-पुलिया, तटबंध और अन्य बुनियादी ढांचे पर भी असर पड़ा है। केंद्रीय टीम ने बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 16 सितंबर को बिहार के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और अधिकारियों के साथ नुकसान एवं राहत कार्यों की समीक्षा की।

राज्य सरकार के विभिन्न विभागों की ओर से प्रारंभिक तौर पर करीब 10,000 करोड़ रुपये के बाढ़ नुकसान का आकलन केंद्र के समक्ष रखा गया है। हालांकि, नुकसान का अंतिम आंकड़ा विस्तृत सर्वे और मूल्यांकन पूरा होने के बाद स्पष्ट होगा और इसमें बदलाव संभव है।

किसानों को अंतिम राहत नुकसान के आकलन के बाद

सरकार की ओर से कहा गया है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में फसल क्षति का आकलन किया जा रहा है। पानी उतरने के बाद खेतों का सर्वे और क्षति का सत्यापन किया जाएगा। इसके आधार पर पात्र किसानों को निर्धारित नियमों के तहत कृषि इनपुट अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा।

ऐसे में किसानों के लिए जरूरी है कि वे अपना कृषक पंजीकरण, आधार से जुड़ा बैंक खाता और मोबाइल नंबर अपडेट रखें तथा कृषि विभाग की ओर से जारी प्रभावित पंचायतों और आवेदन संबंधी सूचना पर नजर रखें।

कृषि इनपुट अनुदान की वास्तविक राशि फसल के प्रकार, सिंचित/असिंचित क्षेत्र और सरकार द्वारा निर्धारित पात्रता एवं क्षति के मानकों के आधार पर तय होगी।

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