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Muzaffarpur News: चंदवारा बूढ़ी गंडक पुल की गुणवत्ता पर सवाल, IIT जांच में 80% UPV टेस्ट फेल

मुजफ्फरपुर के बूढ़ी गंडक पुल की गुणवत्ता पर सवाल, IIT पटना की प्रारंभिक जांच में 80% से अधिक UPV टेस्ट ‘Poor’ पाए गए। मामले में निर्माण एजेंसी पर कार्रवाई हुई है।

1 अक्टूबर 2026 को 9:22 PM बजे
Patna, Bihar
Crime Sach Khabar
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Muzaffarpur News: बूढ़ी गंडक पुल की निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल, IIT पटना की जांच में कंक्रीट को लेकर गंभीर टिप्पणियां

मुजफ्फरपुर: चंदवारा बूढ़ी गंडक नदी पर बने आरसीसी पुल की निर्माण गुणवत्ता को लेकर मामला अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। डॉ. जगन्नाथ मिश्रा कॉलेज के पास स्थित सोडा गोदाम चौक से अहियापुर को जोड़ने वाले इस पुल की तकनीकी स्थिति की जांच IIT पटना की विशेषज्ञ टीम ने की है। जांच से जुड़ी प्रारंभिक रिपोर्ट में पुल के कंक्रीट और कुछ संरचनात्मक हिस्सों को लेकर कई तकनीकी चिंताएं सामने आने की जानकारी है।

यह मामला RTI कार्यकर्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता

देवव्रत कुमार सहनी द्वारा लिखित शिकायत पर बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड की ओर से मामले में कार्रवाई की गई थी। निगम की कार्रवाई के बाद संबंधित कंपनी ने विभाग की कार्रवाई को चुनौती देते हुए पटना हाईकोर्ट में मुकदमा दायर किया। इसी मामले की सुनवाई के दौरान पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर आईआईटी पटना से मुजफ्फरपुर चंदवारा पुल की जांच कराई गई।

UPV जांच में अधिकांश परिणाम ‘Poor’ श्रेणी में

प्रारंभिक जांच में Ultrasonic Pulse Velocity यानी UPV टेस्ट को खास महत्व दिया गया है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, जांच किए गए स्थानों में 80 प्रतिशत से अधिक परीक्षणों के परिणाम ‘Poor’ श्रेणी में दर्ज किए गए, जबकि बाकी परिणाम ‘Doubtful’ श्रेणी में बताए गए हैं।

UPV परीक्षण के जरिए कंक्रीट के भीतर उसकी गुणवत्ता और एकरूपता से संबंधित जानकारी हासिल की जाती है। रिपोर्ट में कंक्रीट के कुछ हिस्सों में हनीकोम्बिंग, अधिक सरंध्रता और आंतरिक दरारों जैसी स्थितियों का भी उल्लेख होने की बात सामने आई है।

इन निष्कर्षों के बाद पुल के विभिन्न हिस्सों की विस्तृत तकनीकी जांच की जरूरत बताई गई है। चूंकि यह अभी प्रारंभिक आकलन है, इसलिए पुल की पूरी संरचनात्मक सुरक्षा के संबंध में अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएगा।

गर्डरों की स्थिति ने बढ़ाई चिंता

जांच से संबंधित विवरण में पुल के कुछ सुलभ गर्डरों पर Shear और Flexural Cracks दिखाई देने की बात भी कही गई है। गर्डर पुल के प्रमुख भार-वहन करने वाले हिस्सों में शामिल होता है। ऐसे में इन दरारों की प्रकृति, गहराई और उनके संरचनात्मक प्रभाव का तकनीकी मूल्यांकन जरूरी हो जाता है।

रिपोर्ट में कंक्रीट की सतह पर 45 मिलीमीटर या उससे अधिक गहराई तक कार्बोनेशन पाए जाने का भी उल्लेख किया गया है। कार्बोनेशन की स्थिति में कंक्रीट के भीतर मौजूद स्टील रिइन्फोर्समेंट के क्षरण का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव कितना है, यह विस्तृत संरचनात्मक जांच के बाद ही स्पष्ट किया जा सकेगा।

नदी में पानी अधिक होने से जांच अधूरी

IIT पटना की विशेषज्ञ टीम को निरीक्षण के दौरान बूढ़ी गंडक नदी के ऊंचे जलस्तर के कारण कुछ हिस्सों तक पहुंचने में परेशानी हुई। खासकर पुल के जलमग्न भाग और गर्डरों के निचले हिस्सों का व्यापक निरीक्षण नहीं हो सका।

इसी कारण वर्तमान जांच को अंतिम रिपोर्ट नहीं माना गया है। जलस्तर कम होने के बाद पुल के शेष हिस्सों का निरीक्षण करने की आवश्यकता बताई गई है। इसके बाद ही पुल की समग्र संरचनात्मक स्थिति का अधिक स्पष्ट आकलन संभव होगा।

निर्माण एजेंसी पर दो साल की कार्रवाई

मामले में पुल निर्माण से जुड़ी एजेंसी मेसर्स गणेश राम दोकानिया के खिलाफ विभागीय कार्रवाई किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, एजेंसी को दो वर्षों के लिए डिबार किया गया है।

यह कार्रवाई निर्माण गुणवत्ता से संबंधित सामने आई शिकायतों और विभागीय जांच के संदर्भ में बताई जा रही है। हालांकि, किसी तकनीकी कमी की अंतिम जिम्मेदारी तय करने के लिए संबंधित विभागीय प्रक्रिया और उपलब्ध जांच रिपोर्टों को देखना जरूरी होगा।

हाईकोर्ट की कार्यवाही पर भी नजर

पुल की गुणवत्ता का मामला पटना हाईकोर्ट में विचाराधीन बताया जा रहा है। जनहित याचिका के माध्यम से पुल की गुणवत्ता और उससे जुड़े जनसुरक्षा के मुद्दे अदालत के समक्ष उठाए गए हैं। इसी मामले की प्रक्रिया में IIT पटना से तकनीकी जांच कराए जाने की बात सामने आई है।

अब आगे की प्रक्रिया में विशेषज्ञों की विस्तृत जांच और अंतिम रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। अंतिम निरीक्षण में उन हिस्सों की स्थिति भी सामने आ सकती है, जिनकी फिलहाल नदी के अधिक जलस्तर के कारण जांच नहीं हो पाई है।

अंतिम रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी पुल की स्थिति

प्रारंभिक रिपोर्ट में सामने आए तकनीकी बिंदुओं के बाद पुल की नियमित निगरानी और आवश्यक सुरक्षा उपायों पर ध्यान देने की जरूरत है। यदि विस्तृत जांच में संरचनात्मक सुधार की आवश्यकता सामने आती है तो विशेषज्ञों की तकनीकी सिफारिश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर IIT पटना की जांच को प्रारंभिक तकनीकी आकलन के तौर पर देखना उचित होगा। पुल की वास्तविक संरचनात्मक स्थिति, मरम्मत की आवश्यकता और सुरक्षा से संबंधित अंतिम तस्वीर विस्तृत निरीक्षण तथा अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।

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