मुजफ्फरपुर चंदवारा पुल अवैध खनन मामला: NGT जांच में 2 घंटे भटकी टीम, नहीं हुआ सत्यापन
मुजफ्फरपुर के चंदवारा पुल के पास कथित अवैध खनन मामले में NGT के आदेश पर पहुंची संयुक्त जांच टीम करीब दो घंटे तक खनन स्थल की तलाश करती रही। भौतिक सत्यापन पूरा नहीं होने के बाद टीम लौट गई। अब जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर है।
NGT जांच में नया मोड़: चंदवारा पुल के पास खनन स्थल का सत्यापन नहीं करा सके कंपनी के प्रतिनिधि, दो घंटे भटकती रही टीम
मुजफ्फरपुर में बूढ़ी गंडक नदी और चंदवारा पुल के आसपास कथित अवैध खनन की जांच के दौरान अधिकारियों की टीम को परेशानी का सामना करना पड़ा। NGT के आदेश पर पहुंचे अधिकारियों को खनन किए गए वास्तविक स्थल का भौतिक सत्यापन कराना था, लेकिन निर्धारित निरीक्षण के दौरान कंपनी के प्रतिनिधि संबंधित स्थल की स्पष्ट पहचान नहीं करा सके। करीब दो घंटे तक क्षेत्र में खोजबीन के बाद टीम बिना भौतिक सत्यापन पूरा किए लौट गई। अब इस पूरे घटनाक्रम को जांच रिपोर्ट में दर्ज कर राष्ट्रीय हरित अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की बात कही जा रही है।
मुजफ्फरपुर के चंदवारा पुल के पास NGT जांच में नया घटनाक्रम
मुजफ्फरपुर: बूढ़ी गंडक नदी के चंदवारा पुल और उसके निर्माण कार्य से जुड़े खनन के मामले में गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को उस समय नया घटनाक्रम सामने आया, जब राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के आदेश के अनुपालन में पहुंची अंतर-विभागीय संयुक्त जांच टीम को भौतिक सत्यापन करने में कठिनाई का सामना करना पड़ा। जांच का उद्देश्य खनन से जुड़े स्थल की पहचान करना और मौके की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करना था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जांच टीम में शामिल अधिकारियों ने चंदवारा पुल और बूढ़ी गंडक नदी के आसपास संबंधित स्थल का पता लगाने का प्रयास किया। इस दौरान ठेकेदार कंपनी के प्रतिनिधि कथित तौर पर उस स्थान की स्पष्ट पहचान नहीं करा सके, जहां से निर्माण कार्य के लिए मिट्टी या बालू का उत्खनन किए जाने का आरोप है।
इसके कारण अधिकारियों की टीम को लगभग दो घंटे तक क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर खोजबीन करनी पड़ी। हालांकि, निर्धारित निरीक्षण के दौरान खनन किए गए वास्तविक स्थल का भौतिक सत्यापन पूरा नहीं हो सका और टीम को वापस लौटना पड़ा।
इस घटनाक्रम के बाद मामले की जांच रिपोर्ट और उसमें दर्ज किए जाने वाले तथ्यों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, खनन स्थल की पहचान नहीं हो पाने के कारणों और कंपनी के पक्ष की आधिकारिक पुष्टि जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।
NGT के आदेश के अनुपालन में पहुंची थी संयुक्त जांच टीम
यह मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण की पूर्वी पीठ, कोलकाता में दायर याचिका O.A. No. 185/2026/EZ, देवव्रत कुमार सहनी बनाम बिहार सरकार एवं अन्य से संबंधित बताया गया है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अधिकरण ने 14 अगस्त 2026 को इस मामले में आदेश पारित किया था। इसी आदेश के अनुपालन में 8 अक्टूबर को संबंधित क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण निर्धारित किया गया था।
जांच का मुख्य उद्देश्य चंदवारा ब्रिज कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट और बूढ़ी गंडक नदी के आसपास खनन से संबंधित शिकायतों की पड़ताल करना था। इसमें यह पता लगाया जाना था कि संबंधित स्थान पर किस प्रकार का उत्खनन हुआ, खनन स्थल कहां स्थित है और इस कार्य के लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं।
इस प्रक्रिया में विभिन्न विभागों के अधिकारियों को शामिल किया गया था, ताकि खनन, पर्यावरण और निर्माण कार्य से संबंधित पहलुओं का निरीक्षण किया जा सके।
जांच टीम में शामिल रहे विभिन्न विभागों के अधिकारी
स्थलीय निरीक्षण के दौरान खनन विभाग, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित निर्माण परियोजना के प्रतिनिधि मौजूद थे।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, जांच टीम में निम्नलिखित लोग शामिल थे:
दानिश आलम: खनन विभाग की ओर से खान निरीक्षक।
एस.एन. झा: बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुजफ्फरपुर क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारी।
जी.एम. वेंकटेश डी.: संबंधित परियोजना की कंपनी एम/एस जेएम एंटरप्राइजेज इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि।
देवव्रत कुमार सहनी: मामले के याचिकाकर्ता।
अन्य संबंधित पदाधिकारी: स्थलीय निरीक्षण एवं जांच प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी।
निरीक्षण के दौरान टीम को खनन किए गए वास्तविक स्थान तक पहुंचने और उसका भौतिक सत्यापन करने में कठिनाई हुई। बताया गया कि करीब दो घंटे तक प्रयास करने के बावजूद संबंधित स्थल की पहचान नहीं हो सकी।
इस कारण निरीक्षण का वह महत्वपूर्ण हिस्सा पूरा नहीं हो पाया, जिसके तहत मौके पर खनन की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाना था।
बिना अनुमति खनन किए जाने का आरोप, जांच में होगी स्थिति स्पष्ट
चंदवारा पुल और उसके एप्रोच रोड के निर्माण से जुड़े कार्यों को लेकर नदी क्षेत्र में मिट्टी और बालू के उत्खनन पर सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि निर्माण कार्य के नाम पर बड़े पैमाने पर खनन किया गया, जबकि संबंधित स्थल के लिए आवश्यक वैध अनुमति नहीं ली गई थी।
आरोपों के मुताबिक, नदी के संवेदनशील हिस्सों में भारी मशीनों की मदद से मिट्टी और बालू की खुदाई की गई। इस संबंध में खनन की अनुमति, पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन और निर्माण कार्य के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया की जांच किए जाने की आवश्यकता है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि जांच के अंतिम निष्कर्षों से ही हो सकेगी। संबंधित स्थल का भौतिक सत्यापन पूरा नहीं होने के कारण फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि उत्खनन किन सटीक स्थानों पर हुआ और वहां किस प्रकार की गतिविधियां संचालित की गई थीं।
ऐसे मामलों में संबंधित विभागों के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होता है कि खनन कार्य के लिए वैध अनुमति उपलब्ध थी या नहीं, उत्खनन निर्धारित सीमा के भीतर हुआ या नहीं और पर्यावरण से संबंधित नियमों का पालन किया गया या नहीं।
बूढ़ी गंडक नदी और चंदवारा पुल की सुरक्षा का मुद्दा भी महत्वपूर्ण
चंदवारा पुल के आसपास कथित खनन का मामला केवल अनुमति से जुड़ा सवाल नहीं है, बल्कि इसमें नदी के प्राकृतिक प्रवाह और पुल की संरचनात्मक सुरक्षा से संबंधित पहलुओं की जांच भी महत्वपूर्ण है।
नदी के आसपास अनियंत्रित खुदाई होने की स्थिति में उसके प्रवाह, किनारों की स्थिरता और आसपास की संरचनाओं पर प्रभाव पड़ सकता है। इसी वजह से पुल निर्माण से जुड़े क्षेत्र में खनन गतिविधियों की जांच करते समय तकनीकी मानकों और पर्यावरणीय नियमों का ध्यान रखना आवश्यक है।
इस मामले में भी यह पता लगाना जरूरी होगा कि कथित उत्खनन से बूढ़ी गंडक नदी के प्रवाह क्षेत्र, पुल के पिलरों, एप्रोच रोड या आसपास के तटबंधों पर कोई प्रभाव पड़ा है या नहीं।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि पुल की संरचना को वास्तव में नुकसान पहुंचा है। इसके लिए संबंधित तकनीकी विशेषज्ञों की जांच और आधिकारिक रिपोर्ट आवश्यक होगी।
जांच रिपोर्ट में दर्ज हो सकता है निरीक्षण का पूरा घटनाक्रम
स्थलीय निरीक्षण के दौरान खनन स्थल का भौतिक सत्यापन पूरा नहीं होने के बाद अब संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बताया गया है कि निरीक्षण के दौरान सामने आई परिस्थितियों और स्थल की पहचान करने में हुई कठिनाइयों को रिपोर्ट में दर्ज कर NGT की पूर्वी पीठ, कोलकाता के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
रिपोर्ट में यदि संबंधित स्थल का सत्यापन अधूरा रहने की बात दर्ज की जाती है, तो आगे की जांच के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जा सकते हैं। इनमें संबंधित दस्तावेजों की जांच, खनन स्थल की दोबारा पहचान, आवश्यक अनुमति की पड़ताल और तकनीकी निरीक्षण जैसे पहलू शामिल हो सकते हैं। हालांकि, आगे क्या कार्रवाई होगी, यह संबंधित अधिकारियों और अधिकरण के निर्देशों पर निर्भर करेगा।
कंपनी के प्रतिनिधि स्थल की पहचान क्यों नहीं करा सके और क्या इसके लिए कोई अतिरिक्त दस्तावेज या तकनीकी जानकारी आवश्यक थी, इन सवालों का जवाब भी जांच के दौरान स्पष्ट होना बाकी है।
अब आगे की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
चंदवारा पुल और बूढ़ी गंडक नदी के आसपास कथित खनन से संबंधित इस मामले में 8 अक्टूबर को हुआ निरीक्षण जांच प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। निर्धारित समय में भौतिक सत्यापन पूरा नहीं होने से अब संबंधित स्थल की पहचान और खनन की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए आगे की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
मामले में आरोपों की पुष्टि, खनन की वैधता और पर्यावरणीय प्रभाव से जुड़े निष्कर्ष आधिकारिक दस्तावेजों तथा तकनीकी जांच के आधार पर ही सामने आएंगे।
फिलहाल, इस पूरे मामले में जांच रिपोर्ट और राष्ट्रीय हरित अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले तथ्यों पर नजर बनी हुई है। आगे की कार्रवाई से यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित स्थल पर खनन की वास्तविक स्थिति क्या थी और नियमों के अनुपालन को लेकर किन बिंदुओं की जांच आवश्यक है।
कमेंट्स लोड हो रहे हैं...
