Festival

नवरात्रि 2026: 11 अक्टूबर से शुरू होगा शारदीय नवरात्र, जानें पूजा विधि

शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी। जानें मां दुर्गा के नौ स्वरूप, कलश स्थापना का महत्व, पूजा विधि और नवरात्रि की प्रमुख परंपराएं।

11 अक्टूबर 2026 को 8:00 AM बजे
Muzaffarpur, Bihar
Crime Sach Khabar
5 min read
411379.png

नवरात्र 2026: 11 अक्टूबर से शुरू होगी शारदीय नवरात्रि, जानें नौ दिनों की पूजा, कलश स्थापना और मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का महत्व

शारदीय नवरात्रि 2026 को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है। हिंदू धर्म में नवरात्रि को मां दुर्गा की उपासना का विशेष पर्व माना जाता है। इस दौरान भक्त नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं। घरों से लेकर मंदिरों तक धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारी की जाती है। कई जगहों पर दुर्गा पूजा पंडाल सजाए जाते हैं, जबकि श्रद्धालु अपने घरों में कलश स्थापना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।

शारदीय नवरात्रि का पर्व आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है। वर्ष 2026 में नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से होने की जानकारी दी जा रही है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाएगी। नवरात्रि के समापन के बाद विजयादशमी का त्योहार मनाया जाएगा, जिसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।

नवरात्रि के पहले दिन होगी कलश स्थापना

नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। इसी के साथ नौ दिनों तक चलने वाली पूजा की शुरुआत होती है। श्रद्धालु सुबह स्नान करने के बाद पूजा स्थल की साफ-सफाई करते हैं और मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करते हैं। इसके बाद धार्मिक परंपराओं के अनुसार कलश स्थापना कर पूजा-अर्चना की जाती है।

कलश स्थापना के दौरान मिट्टी का पात्र, जौ, जल, नारियल, लाल वस्त्र, रोली, अक्षत, फूल और दीपक जैसी पूजन सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा की विधि में कुछ अंतर हो सकता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की आराधना करने से भक्तों को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। हालांकि, पूजा-पाठ और व्रत का तरीका श्रद्धालु अपनी आस्था तथा पारिवारिक परंपरा के अनुसार तय करते हैं।

नौ दिनों तक होगी मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा

नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां दुर्गा के एक स्वरूप की पूजा की जाती है। इन नौ स्वरूपों को नवदुर्गा कहा जाता है। प्रत्येक स्वरूप का अपना धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है।

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन मां चंद्रघंटा और चौथे दिन मां कूष्मांडा की आराधना होती है। पांचवें दिन मां स्कंदमाता, छठे दिन मां कात्यायनी और सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है।

इसी तरह आठवें दिन मां महागौरी और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की उपासना की जाती है। श्रद्धालु इन नौ दिनों में दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती और अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ करते हैं। कई मंदिरों में विशेष आरती, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

व्रत और पूजा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपवास रखते हैं। कुछ लोग नौ दिनों तक व्रत करते हैं, जबकि कई भक्त पहले और आखिरी दिन उपवास रखते हैं। व्रत के दौरान फल, दूध और अन्य फलाहार का सेवन करने की परंपरा भी प्रचलित है।

व्रत रखने वाले लोगों को अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। पूजा के दौरान स्वच्छता बनाए रखना, सात्विक भोजन करना और अपनी परंपरा के अनुसार धार्मिक नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण माना जाता है।

नवरात्रि के अवसर पर कई परिवारों में अखंड ज्योति जलाने की परंपरा भी है। ऐसी स्थिति में आग से सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। दीपक को सुरक्षित स्थान पर रखें और उसे ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें।

महाष्टमी और महानवमी पर होंगे विशेष धार्मिक अनुष्ठान

नवरात्रि के दौरान महाष्टमी और महानवमी का विशेष महत्व होता है। इन अवसरों पर कई घरों और मंदिरों में विशेष पूजा, हवन और कन्या पूजन किया जाता है। कन्या पूजन के दौरान छोटी बच्चियों को देवी स्वरूप मानकर उनका सम्मान किया जाता है और उन्हें भोजन कराया जाता है।

यह परंपरा श्रद्धा के साथ-साथ बालिकाओं के प्रति सम्मान और स्नेह का संदेश भी देती है। हालांकि, कन्या पूजन की तिथि और विधि अलग-अलग परिवारों में प्रचलित मान्यताओं के अनुसार भिन्न हो सकती है।

श्रद्धालुओं को अष्टमी, नवमी और व्रत पारण की तिथि निर्धारित करने के लिए स्थानीय पंचांग का सहारा लेना चाहिए। कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त की जानकारी भी अपने शहर के पंचांग के अनुसार प्राप्त करना उचित रहेगा।

मंदिरों और पूजा पंडालों में दिखेगी रौनक

नवरात्रि के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं। मंदिरों में विशेष सजावट की जाती है और पूजा समितियां दुर्गा पूजा की तैयारियों में जुट जाती हैं। कई स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन-कीर्तन और सामूहिक आरती का आयोजन किया जाता है।

बाजारों में भी त्योहार को लेकर चहल-पहल बढ़ जाती है। श्रद्धालु पूजा सामग्री, फूल, फल, मिठाइयां और नए कपड़ों की खरीदारी करते हैं। दुर्गा पूजा पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं, जहां बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

धार्मिक आयोजनों के दौरान साफ-सफाई, यातायात व्यवस्था और सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी है। पूजा समितियों और श्रद्धालुओं को सार्वजनिक स्थानों पर व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करना चाहिए।

नवरात्रि का संदेश है शक्ति, साहस और सद्भाव

नवरात्रि केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है। यह पर्व लोगों को साहस, धैर्य, अनुशासन और सकारात्मक सोच अपनाने की प्रेरणा भी देता है। मां दुर्गा को शक्ति का प्रतीक माना जाता है। उनकी उपासना के माध्यम से श्रद्धालु जीवन की कठिनाइयों का सामना करने और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा लेते हैं।

नवरात्रि के दौरान जरूरतमंदों की सहायता करना, महिलाओं का सम्मान करना और समाज में आपसी भाईचारा बनाए रखना भी पर्व की भावना को मजबूत करता है।

कुल मिलाकर, शारदीय नवरात्रि 2026 श्रद्धालुओं के लिए आस्था और भक्ति का महत्वपूर्ण अवसर होगा। नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा के साथ भक्त परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करेंगे। विजयादशमी के साथ इस पर्व का समापन होगा, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है।

कमेंट्स लोड हो रहे हैं...