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Raksha Bandhan 2026: 28 अगस्त को मनाया जाएगा रक्षाबंधन, जानें राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

“रक्षाबंधन 2026: 28 अगस्त को मनाए जाने वाले इस पावन पर्व पर जानें राखी बांधने का शुभ मुहूर्त, पूर्णिमा तिथि, भद्रा का समय और भाई-बहन के इस खास त्योहार का महत्व।”

27 अगस्त 2026 को 8:29 AM बजे
Muzaffarpur, Bihar
Crime Sach Khabar
4 min read
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Raksha Bandhan 2026: 28 अगस्त को मनाया जाएगा रक्षाबंधन, जानिए राखी बांधने का शुभ मुहूर्त और पर्व का महत्व

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और आपसी स्नेह का पर्व रक्षाबंधन इस साल शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। श्रावण मास की पूर्णिमा पर मनाए जाने वाले इस त्योहार को लेकर इस बार तारीख को लेकर कुछ भ्रम की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त से शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। पंचांग के अनुसार भारत में रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को मनाया जाएगा।

27 या 28 अगस्त, कब है रक्षाबंधन?

रक्षाबंधन को लेकर सबसे ज्यादा सवाल इसकी तारीख को लेकर है। दरअसल, 2026 में पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 को सुबह 9:08 बजे शुरू होगी और 28 अगस्त को सुबह 9:48 बजे समाप्त होगी। ऐसे में पूर्णिमा दो तारीखों को स्पर्श कर रही है।

धार्मिक परंपरा के अनुसार त्योहार की तिथि निर्धारित करते समय सूर्योदय के समय मौजूद तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है। इसी आधार पर इस वर्ष भारत में रक्षाबंधन 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। सरकारी अवकाश सूची में भी रक्षाबंधन की तारीख 28 अगस्त दर्ज है।

राखी बांधने का शुभ समय

रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने के शुभ समय को लेकर भी लोगों में खास उत्सुकता रहती है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार 28 अगस्त को सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। इस अवधि की कुल अवधि करीब 3 घंटे 51 मिनट है।

पंचांग के अनुसार इस साल रक्षाबंधन के दिन भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाती है। धार्मिक मान्यताओं में भद्रा काल के दौरान राखी बांधने से बचने की परंपरा रही है। इसलिए शुभ समय में ही राखी बांधना उचित माना जाता है।

क्यों खास है रक्षाबंधन?

रक्षाबंधन केवल कलाई पर राखी बांधने का त्योहार नहीं है। यह भाई-बहन के बीच भरोसे, स्नेह और जिम्मेदारी के रिश्ते को मजबूत करने का अवसर भी है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं, तिलक लगाती हैं और उनकी सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। बदले में भाई बहन की सुरक्षा, सम्मान और हर परिस्थिति में साथ देने का संकल्प लेते हैं।

समय के साथ इस त्योहार का स्वरूप भी बदल रहा है। आज कई परिवारों में बहनें और भाई दूर-दराज के शहरों या विदेशों में रहते हैं। ऐसे में वीडियो कॉल, ऑनलाइन गिफ्ट और डाक या कूरियर के जरिए राखी भेजकर भी परिवार इस परंपरा को निभा रहे हैं।

राखी की थाली में क्या रखें?

रक्षाबंधन पर पूजा की थाली को लेकर भी अलग-अलग परिवारों में अपनी परंपराएं हैं। सामान्य तौर पर थाली में राखी, रोली या कुमकुम, अक्षत यानी चावल, दीपक, मिठाई और आरती की सामग्री रखी जाती है।

बहन भाई को तिलक लगाने के बाद राखी बांधती है और आरती करती है। इसके बाद भाई बहन को उपहार देकर उसके प्रति अपने स्नेह का इजहार करता है। तिलक के साथ अक्षत लगाने की परंपरा को शुभता, समृद्धि और मंगलकामना से जोड़ा जाता है।

इस बार क्यों चर्चा में है रक्षाबंधन?

2026 का रक्षाबंधन इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि त्योहार की तारीख को लेकर 27 और 28 अगस्त के बीच भ्रम सामने आया। इसके अलावा इसी अवधि में खगोलीय घटना के कारण भी रक्षाबंधन को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं।

हालांकि भारत में दिखाई देने वाली खगोलीय स्थिति और धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़े नियमों को अलग-अलग समझना जरूरी है। त्योहार से जुड़े धार्मिक निर्णय के लिए स्थानीय पंचांग और परंपरा को प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है।

भाई-बहन के रिश्ते का उत्सव है राखी

रक्षाबंधन का असली संदेश केवल रक्षा के वचन तक सीमित नहीं है। बदलते समय में यह पर्व भाई और बहन दोनों के लिए एक-दूसरे के सम्मान, सहयोग और भावनात्मक साथ का प्रतीक बन गया है।

बचपन की नोकझोंक से लेकर बड़े होने के बाद की जिम्मेदारियों तक भाई-बहन का रिश्ता कई पड़ावों से गुजरता है। रक्षाबंधन इन यादों को फिर से ताजा करने और रिश्ते में अपनापन बढ़ाने का अवसर देता है।

इस साल 28 अगस्त 2026 को जब घरों में राखी की थाली सजेगी और भाई-बहन एक-दूसरे की कलाई पर प्रेम का धागा बांधेंगे, तब इस त्योहार का संदेश भी यही होगा कि रिश्ते केवल रस्मों से नहीं, बल्कि भरोसे, सम्मान और साथ निभाने से मजबूत होते हैं।

डिस्क्लेमर: राखी के शुभ मुहूर्त से जुड़ी गणना स्थान और स्थानीय पंचांग के अनुसार कुछ मिनट अलग हो सकती है। धार्मिक अनुष्ठान के लिए अपने क्षेत्र के पंचांग को प्राथमिकता दें।

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