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Muzaffarpur News: मुशहरी प्रखंड के भीखनपुर में PM आवास योजना की लिस्ट पर हंगामा, गड़बड़ी के आरोप

मुशहरी के भीखनपुर पंचायत में पीएम आवास योजना की सूची को लेकर हंगामा हुआ। ग्रामीणों ने अपात्र लोगों के नाम शामिल होने और पात्र परिवारों के नाम हटाने का आरोप लगाते हुए दोबारा जांच की मांग की है।

25 सितंबर 2026 को 3:10 PM बजे
Muzaffarpur, Bihar
Crime Sach Khabar
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भीखनपुर पंचायत में पीएम आवास योजना की सूची पर हंगामा, एक ही परिवार के कई नाम होने का आरोप; ग्रामीणों ने जांच की मांग

मुजफ्फरपुर: मुशहरी प्रखंड की भीखनपुर पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया है। पंचायत भवन परिसर में बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने सूची में नाम चयन को लेकर सवाल उठाए और दोबारा जांच कराने की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि आवास योजना की सूची में ऐसे लोगों के नाम भी शामिल किए गए हैं, जिनके पास पहले से पक्का मकान है। वहीं कुछ ग्रामीणों का कहना है कि जरूरतमंद और पात्र परिवारों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। इसको लेकर पंचायत भवन पर काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही और ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

ग्रामीणों के मुताबिक भीखनपुर पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए करीब 600 से अधिक लोगों की सूची जांच के लिए तैयार की गई थी। बाद में जारी सूची में करीब 400 लोगों के नाम शामिल होने की बात सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि सूची में नाम आने के बाद जब लोगों ने इसकी पड़ताल की तो कई ऐसे मामले सामने आए, जिनमें एक ही घर या परिवार से कई लोगों के नाम आवास योजना की सूची में होने का आरोप लगाया गया। कुछ ग्रामीणों ने दावा किया कि एक ही घर में सात लोगों के नाम सूची में दर्ज हैं, जबकि कई जरूरतमंद परिवारों का नाम सूची में नहीं है।

ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ वास्तविक रूप से जरूरतमंद और पात्र परिवारों को मिलना चाहिए, लेकिन सूची में पक्के मकान वाले लोगों के नाम कथित तौर पर कैसे शामिल हो गए। लोगों ने आरोप लगाया कि जिन परिवारों के पास पहले से पक्का मकान है, उनके नाम सूची में दिखाई दे रहे हैं, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर और आवास की जरूरत वाले कुछ परिवारों को सूची से बाहर कर दिया गया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सूची में शामिल सभी लाभुकों का भौतिक सत्यापन कराया जाए और पात्रता की दोबारा जांच की जाए।

मामले को लेकर ग्रामीणों ने सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। लोगों का आरोप है कि जब प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए नाम जोड़ने और लाभुकों की जांच की प्रक्रिया चल रही थी, उस दौरान कथित तौर पर पैसे के लेन-देन का खेल हुआ। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों से योजना में नाम जुड़वाने के नाम पर पैसे लिए गए। हालांकि यह गंभीर आरोप है और इसकी भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन पूरे मामले की जांच कराए तो यह स्पष्ट हो सकता है कि सूची में नाम किस आधार पर जोड़े गए और किन लोगों के नाम किन कारणों से हटाए गए।

भीखनपुर पंचायत के मुखिया अनिल साहनी ने मामले पर कहा कि पंचायत स्तर से 600 से अधिक लोगों की सूची की जांच कराकर आगे भेजी गई थी। जांच के बाद करीब 400 लोगों के नाम सूची में आने की जानकारी है। मुखिया ने कहा कि अब किन लोगों के नाम काटे गए या किस स्तर पर सूची में बदलाव हुआ, इसकी उन्हें पूरी जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सूची की आगे की प्रक्रिया और सत्यापन संबंधित विभागीय स्तर पर होता है। ऐसे में ग्रामीणों की ओर से लगाए जा रहे आरोपों की जांच संबंधित अधिकारियों द्वारा किए जाने की जरूरत है।

वहीं पंचायत स्तर पर आवास योजना से जुड़े सहायक ने बताया कि उनकी ओर से सूची भेजी गई थी, लेकिन बाद की जांच के दौरान दूसरे आवास सहायक को सत्यापन की जिम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने कहा कि बाद में किस तरह से जांच हुई और किन आधारों पर लाभुकों के नाम सूची में शामिल या बाहर किए गए, इसकी पूरी जानकारी उनके पास नहीं है। इस बयान के बाद ग्रामीणों ने भी सवाल उठाया है कि यदि जांच के अलग-अलग चरणों में अलग-अलग कर्मियों की भूमिका रही है तो पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

मामले को लेकर मुशहरी के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) ने कहा कि यदि किसी ऐसे व्यक्ति का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में आया है, जिसके पास पहले से पक्का मकान है, तो इस संबंध में आवेदन मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पात्रता की जांच के बाद यदि कोई व्यक्ति योजना के लिए योग्य नहीं पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है और उसकी राशि रोकी जा सकती है। BDO के इस बयान के बाद ग्रामीणों को उम्मीद है कि शिकायत मिलने पर प्रशासन स्तर से सूची की जांच की जाएगी।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य ऐसे परिवारों को आवास उपलब्ध कराना है, जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है। ऐसे में यदि सूची में अपात्र लाभुकों के नाम शामिल होने की शिकायत सामने आती है तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि भीखनपुर पंचायत में जारी सूची के प्रत्येक लाभुक का भौतिक सत्यापन कराया जाए। साथ ही यह भी जांच हो कि लाभुक के पास पहले से पक्का मकान है या नहीं, परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर पहले से आवास योजना का लाभ तो नहीं लिया गया है और सूची तैयार करने के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं।

मामले में पैसे के लेन-देन के आरोप भी ग्रामीणों की ओर से लगाए गए हैं। ऐसे आरोपों की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक जांच के दौरान यदि किसी व्यक्ति से योजना में नाम जोड़ने के नाम पर राशि लेने की शिकायत मिलती है तो उसके आधार और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा सकती है। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन शिकायतों को दर्ज कर दस्तावेजों और लाभुकों के सत्यापन के आधार पर स्थिति स्पष्ट करे। इससे पात्र लोगों को योजना का लाभ मिलने और सूची को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब मिलने की उम्मीद है।

फिलहाल भीखनपुर पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बनी हुई है। पंचायत भवन पर हुए हंगामे के बाद अब लोगों की नजर प्रशासनिक जांच पर है। ग्रामीण चाहते हैं कि सूची में शामिल करीब 400 लाभुकों की पात्रता की दोबारा जांच की जाए और यदि किसी अपात्र व्यक्ति का नाम पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई हो। साथ ही जिन वास्तविक जरूरतमंद परिवारों का नाम सूची से बाहर होने का दावा किया जा रहा है, उनकी शिकायतों की भी जांच की जाए। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले में किस स्तर पर जांच शुरू करता है और जांच के बाद सूची में क्या बदलाव किए जाते हैं।

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