Agriculture

Muzaffarpur News: दाखिल-खारिज की सुनवाई में दो पक्षों में विवाद, अंचल कार्यालय में हंगामा

मुजफ्फरपुर के मुशहरी अंचल कार्यालय में पुश्तैनी जमीन से जुड़े दाखिल-खारिज मामले की सुनवाई के दौरान दो पक्षों में विवाद हो गया। अधिकारियों ने दोनों पक्षों को समझाकर मामला शांत कराया।

7 अक्टूबर 2026 को 6:11 PM बजे
Muzaffarpur, Bihar
Crime Sach Khabar
4 min read
403616.png

मुजफ्फरपुर: दाखिल-खारिज की सुनवाई के दौरान दो पक्षों में विवाद, अंचल कार्यालय में कुछ देर हंगामा

मुशहरी अंचल कार्यालय में पुश्तैनी जमीन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान हुआ विवाद, राजस्व अधिकारी और पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाकर कराया शांत

मुजफ्फरपुर। मुशहरी अंचल कार्यालय में दाखिल-खारिज से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान बुधवार को दो पक्षों के बीच विवाद हो गया। जमीन पर आपत्ति दर्ज कराने को लेकर शुरू हुई बहस के बाद दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और अंचल कार्यालय परिसर में कुछ देर के लिए हंगामे जैसी स्थिति बन गई।

मामले की जानकारी मिलने के बाद राजस्व अधिकारी और पुलिस मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने दोनों पक्षों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराया। इसके बाद अंचल कार्यालय में सामान्य कामकाज दोबारा शुरू हो सका।

पुश्तैनी जमीन से जुड़ा है मामला

जानकारी के अनुसार, पूरा मामला मुशहरी प्रखंड की भिखनपुर पंचायत के रसूलपुर सैयद सलाम गांव की पुश्तैनी जमीन से संबंधित है। इस जमीन की जमाबंदी अपने नाम कराने के लिए परिवार की कुछ महिलाओं की ओर से आवेदन दिया गया था। आवेदन की प्रक्रिया के दौरान परिवार के ही एक सदस्य की ओर से जमीन पर आपत्ति दर्ज कराई गई।

इसी आपत्ति पर अंचल कार्यालय में सुनवाई चल रही थी। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने जमीन पर अपने-अपने दावे और पक्ष को अधिकारियों के सामने रखने की कोशिश की। इसी दौरान किसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच बहस बढ़ गई।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, एक पक्ष का कहना था कि परिवार की कुछ महिलाओं ने अपने हिस्से से अधिक जमीन पहले ही बेच दी है। इसलिए बची हुई पुश्तैनी जमीन पर उनके दावे को लेकर सवाल उठता है। वहीं दूसरे पक्ष की ओर से जमीन में अपने अधिकार और हिस्सेदारी की बात कही गई।

सुनवाई के दौरान बढ़ा विवाद

अंचल कार्यालय में मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी होने लगी। मामला बढ़ने पर कार्यालय परिसर में मौजूद लोगों का ध्यान भी इस ओर गया। कुछ देर के लिए वहां अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।

स्थिति को देखते हुए राजस्व अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया। पुलिस की मौजूदगी में दोनों पक्षों को समझाया गया और विवाद को आगे बढ़ने से रोका गया। अधिकारियों ने पक्षकारों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा जमीन से जुड़े विवाद को संबंधित कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से सुलझाने की बात कही।

इस दौरान कार्यालय का कामकाज भी कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ। हालांकि बाद में स्थिति सामान्य हो गई।

जमीन के अधिकार को लेकर अलग-अलग दावे

मामले में दोनों पक्षों की ओर से जमीन पर अपने-अपने अधिकार का दावा किया जा रहा है। एक पक्ष का कहना है कि जमीन पुश्तैनी है और परिवार के सदस्यों के बीच हिस्सेदारी का विषय है। वहीं दूसरे पक्ष की ओर से जमीन के पूर्व में किए गए बंटवारे और बिक्री से जुड़े दावे सामने रखे गए हैं।

ऐसे मामलों में जमीन के वास्तविक स्वामित्व और हिस्सेदारी का निर्धारण संबंधित दस्तावेजों, राजस्व रिकॉर्ड और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर किया जाता है। केवल सुनवाई के दौरान किसी पक्ष की ओर से लगाए गए आरोप को अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता।

उच्च न्यायालय में भी मामला विचाराधीन

राजस्व अधिकारी करुण करुण के अनुसार, सुनवाई के दौरान दोनों पक्ष अचानक आपस में उलझ गए थे। अधिकारियों ने समझा-बुझाकर स्थिति को शांत कराया। उन्होंने यह भी बताया कि जमीन से संबंधित एक मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।

ऐसे में मामले से जुड़े पक्षों को न्यायालय और राजस्व विभाग की निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने की सलाह दी गई है। जमीन के अधिकार को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित दस्तावेजों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

प्रशासन ने कराया मामला शांत

घटना के बाद अंचल कार्यालय में स्थिति सामान्य बताई गई। राजस्व विभाग और पुलिस की पहल के बाद दोनों पक्षों के बीच तत्काल विवाद को शांत कराया गया। प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई कि जमीन या दाखिल-खारिज से जुड़े मामलों में किसी भी तरह का विवाद होने पर कानून अपने हाथ में लेने के बजाय संबंधित अधिकारी के समक्ष अपनी बात रखें।

दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में जमीन से जुड़े दस्तावेजों और आपत्तियों की जांच के बाद नियमानुसार निर्णय लिया जाता है। इसलिए किसी भी पक्ष के लिए जरूरी है कि वह अपने दावे के समर्थन में उपलब्ध दस्तावेज संबंधित कार्यालय में प्रस्तुत करे।

फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से दोनों पक्षों को शांत रहने और कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ने की सलाह दी गई है। जमीन से जुड़े विवाद के अंतिम समाधान के लिए संबंधित राजस्व रिकॉर्ड और न्यायालय में चल रही प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

नोट: यह खबर उपलब्ध जानकारी और संबंधित पक्षों के दावों के आधार पर तैयार की गई है। किसी भी आरोप को अंतिम सत्य या न्यायिक निष्कर्ष के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।

कमेंट्स लोड हो रहे हैं...