Muzaffarpur News: अहियापुर स्थित सरकारी स्कूल में करंट से दो छात्राएं झुलसीं, SKMCH में भर्ती
मुजफ्फरपुर के अहियापुर स्थित सरकारी स्कूल के पास बिजली करंट की चपेट में आने से छठी कक्षा की दो छात्राएं झुलस गईं। दोनों को SKMCH में भर्ती कराया गया है। ग्रामीणों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
मुजफ्फरपुर: सरकारी स्कूल के पास 11 हजार वोल्ट के बिजली तार की चपेट में आईं दो छात्राएं, SKMCH में भर्ती
मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में अहियापुर चौक के पास स्थित राजकीय उत्क्रमित विद्यालय की दो छात्राएं बिजली करंट की चपेट में आने से झुलस गईं। घटना शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे की बताई जा रही है। दोनों छात्राएं छठी कक्षा में पढ़ती हैं। हादसे के बाद उन्हें इलाज के लिए श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SKMCH) में भर्ती कराया गया। घटना के बाद स्कूल परिसर के आसपास बिजली के तारों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय ग्रामीणों ने स्कूल के प्रधानाध्यापक पर लापरवाही का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि घटना के समय स्कूल का गेट बंद होने के कारण स्कूल में ग्रामीण बचाव के लिए नहीं पहुंच सके और काफी देर लग गया बच्चों को परेशानी हुई और इस मामले में पहले से सतर्कता बरती जाती तो ऐसी स्थिति से बचने की संभावना थी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। घटना को लेकर संबंधित विभागों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
अहियापुर के सरकारी स्कूल में कैसे हुई घटना?
मिली जानकारी के अनुसार, अहियापुर चौक के पास स्थित राजकीय उत्क्रमित विद्यालय में शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे यह घटना हुई। बताया जा रहा है कि स्कूल की दीवार के पास से 11 हजार वोल्ट का बिजली का तार गुजरता है। इसी तार से संबंधित हादसे में छठी कक्षा में पढ़ने वाली दो छात्राएं झुलस गईं।
घटना की जानकारी मिलने के बाद आसपास के लोगों में चिंता का माहौल बन गया। दोनों छात्राओं को इलाज के लिए SKMCH ले जाया गया, जहां उन्हें भर्ती कराया गया है।
हालांकि, घटना के दौरान छात्राएं किस परिस्थिति में बिजली के तार की चपेट में आईं, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है। हादसे के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए जांच और संबंधित विभाग की जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
घायल छात्राओं की हुई पहचान
इस घटना में घायल दोनों छात्राएं छठी कक्षा की विद्यार्थी हैं। उनकी पहचान संध्या कुमारी और नंदनी कुमारी के रूप में हुई है।
पहली छात्रा संध्या कुमारी की उम्र 12 वर्ष बताई गई है। वह सगहरी गांव की रहने वाली है। उसके पिता का नाम राजकुमार गुप्ता है।
वहीं, दूसरी छात्रा नंदनी कुमारी की उम्र 13 वर्ष है। उसके पिता का नाम ब्रजेश कुमार सिंह बताया गया है। नंदनी मूल रूप से सीतामढ़ी जिले के खैसान गांव की रहने वाली है। वह मुजफ्फरपुर के अहियापुर इलाके में किराये के मकान में रहकर पढ़ाई करती है।
दोनों छात्राओं के साथ हुई इस घटना से उनके परिजनों और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है। फिलहाल दोनों का SKMCH में इलाज चल रहा है। उनकी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी मिलने का इंतजार है।
स्कूल का गेट बंद होने को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने स्कूल के गेट को लेकर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि घटना के समय स्कूल का गेट बंद था। उनका कहना है कि उन्होंने हेडमास्टर से गेट खोलने के लिए भी कहा था, लेकिन गेट नहीं खोला गया।
ग्रामीणों के मुताबिक, यदि समय रहते उचित कदम उठाए जाते तो बच्चों को सहायता पहुंचाने में आसानी हो सकती थी। हालांकि, स्कूल का गेट किस परिस्थिति में बंद था और उसे खोलने को लेकर वास्तव में क्या हुआ, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इस मामले में स्कूल प्रबंधन का विस्तृत पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल ग्रामीणों की ओर से लगाए गए आरोपों को जांच के आधार पर सत्यापित किया जाना जरूरी है।
बिजली विभाग को शिकायत करने के आरोप
ग्रामीणों ने स्कूल की दीवार के पास से गुजर रहे बिजली के तार की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि यदि इस संबंध में पहले बिजली विभाग को शिकायत की गई होती और आवश्यक सुरक्षा उपाय किए गए होते, तो हादसे को रोकने की संभावना हो सकती थी।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि बिजली के तार को लेकर पहले किसी अधिकारी या विभाग को लिखित अथवा मौखिक शिकायत दी गई थी या नहीं। इस संबंध में बिजली विभाग की ओर से आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
11 हजार वोल्ट की बिजली लाइन के आसपास सुरक्षा मानकों का पालन करना बेहद महत्वपूर्ण है। स्कूल जैसे स्थानों पर बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बिजली के तारों की स्थिति, उनकी दूरी और आसपास की व्यवस्था की जांच की जानी चाहिए।
यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।
हेडमास्टर ने घटना की पुष्टि की, विस्तृत जानकारी देने से किया परहेज
घटना के संबंध में स्कूल के हेडमास्टर ने बताया कि दो बच्चे बिजली करंट की चपेट में आने से झुलस गए हैं और दोनों को SKMCH में भर्ती कराया गया है।
हालांकि, हेडमास्टर ने मीडिया को इस मामले में विस्तृत जानकारी देने से मना कर दिया। स्कूल प्रबंधन की ओर से घटना की परिस्थितियों, गेट बंद होने के आरोप और बिजली के तार की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इस कारण घटना से जुड़े कई सवालों के जवाब अभी स्पष्ट नहीं हैं। संबंधित अधिकारियों की जांच और स्कूल प्रबंधन के विस्तृत पक्ष से मामले की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
इस घटना ने स्कूल परिसर के आसपास बिजली की लाइन की सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत को सामने रखा है। शैक्षणिक संस्थानों के आसपास बिजली के तारों की स्थिति और बच्चों की आवाजाही वाले स्थानों पर सुरक्षा उपायों की नियमित जांच जरूरी है।
स्थानीय प्रशासन, शिक्षा विभाग और बिजली विभाग को ऐसे मामलों में समन्वय बनाकर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। यदि किसी स्कूल के आसपास बिजली की लाइन से खतरा होने की आशंका है, तो उसकी जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।
साथ ही, किसी हादसे की स्थिति में बच्चों को तुरंत सहायता उपलब्ध कराने और संबंधित अधिकारियों को सूचना देने की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है।
जांच और आधिकारिक जानकारी का इंतजार
फिलहाल इस घटना में दो छात्राओं के झुलसने और उन्हें SKMCH में भर्ती कराए जाने की जानकारी सामने आई है। ग्रामीणों ने स्कूल प्रबंधन और बिजली की लाइन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आरोप लगाए हैं, जबकि हेडमास्टर ने दोनों छात्राओं के अस्पताल में भर्ती होने की पुष्टि की है।
हादसे की वास्तविक परिस्थितियों, स्कूल के गेट को लेकर लगाए गए आरोपों और बिजली विभाग की जिम्मेदारी के संबंध में आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
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